World Intellectual Property Day : आखिर क्यों मनाया जाता है यह दिवस? जानिए कॉपीराइट से जुड़े कुछ अनोखे मामले

चैतन्य भारत न्यूज

हर वर्ष 26 अप्रैल को ‘विश्व बौद्धिक संपदा दिवस’ (World Intellectual Property Day) मनाया जाता है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा यह दिवस नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन, कॉपीराइट) की भूमिका के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।

विश्व बौद्धिक संपदा दिवस इतिहास

अक्टूबर 1999 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की महासभा में विश्व बौद्धिक संपदा दिवस घोषित करने के विचार को मंजूरी दी गई थी। बाद में इसकी स्थापना वर्ष 2000 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा की गई। 26 अप्रैल को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन 1970 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन की स्थापना के लिए समझौता लागू हुआ था। डब्ल्यूआईपीओ इस दिन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों के आयोजन के लिए अलग-अलग सरकारी एजेंसियों, गैर– सरकारी संगठनों, सामुदायिक समूहों औऱ व्यक्तियों के साथ मिलकर काम करता है।

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के बारे में:

WIPO का पूरा नाम World Intellectual Property Organization है। यह संयुक्त राष्ट्र की सबसे पुरानी एजेंसियों में से एक है। इसका गठन 1967 में रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और विश्व में बौद्धिक संपदा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिये किया गया था। इसके तहत वर्तमान में 26 अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ आती हैं। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्रजलैंड में है। संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश इसके सदस्य बन सकते हैं, लेकिन यह बाध्यकारी नहीं है। भारत 1975 में WIPO का सदस्य बना था।

कॉपीराइट के कुछ अनोखे मामले

कॉपीराइट सिर्फ अविष्कारों को लेकर ही बल्कि व्यंजनों का भी होता है। करीब 3 साल पहले बंगाल और ओडिशा के बीच रसगुल्ले को लेकर विवाद में जीत पश्चिम बंगाल की हुई थी।


कॉपीराइट का एक मामला यह भी था जब अमिताभ बच्चन ने अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की एक कविता कुमार विश्वास द्वारा उपयोग करने पर आपत्ति जताई थी और कुमार विश्वास ने इसके एवज में 32 रुपए उन्हें लौटाए थे।

साल 2016 में Paypal ने Paytm के खिलाफ आपत्ति दायर की Paytm ने Paypal से ही नाम लिया है क्योकि शुरुआती नाम pay से शुरू है। साथ ही दोनों ही ऑनलाइन भुगतान से सम्बंधित है।

कई सालो पहले Bata (शूज़ निर्माता कंपनी) ने उसी के नाम से फॉम बेचने वाली कंपनी के खिलाफ केस किया था, और वह केस जीत गयी।

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