विश्व साक्षरता दिवस : भारत में 3.5 करोड़ बच्चे नहीं जा पाते स्कूल, इतना पढ़ा-लिखा है हमारा देश

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चैतन्य भारत न्यूज

शिक्षा व्यक्ति के जीवन का सबसे आवश्यक अंग है। दुनियाभर के लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 8 सितंबर को ‘अंतरराष्ट्रीय/ विश्व साक्षरता दिवस’ मनाया जाता है। साल 1966 में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया था।


क्या है उद्देश्य

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को शिक्षा प्राप्त करने के लिए उत्साहित करना है। यह दिन सभी के लिए अहम है, क्योंकि हमारे जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महत्त्व है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में पुरुषों की तुलना में महिला साक्षरता कम है।

भारत में साक्षरता दर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की वयस्क साक्षरता दर 74-75 प्रतिशत है। यह दुनिया भर में औसत 86 प्रतिशत से नीचे है। वहीं साल 2015 की बात करें तो उस वक्त भारत की साक्षरता दर 71.96 प्रतिशत थी। सर्ड्स इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में शहरी जगहों पर अभी भी 35 मिलियन यानी करीब 3.5 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल नहीं जाते हैं। शिक्षा का अधिकार कानून के अनुसार, 14 साल की उम्र तक के बच्चों को स्कूल जाना अनिवार्य है। ज्यादातर बच्चों के स्कूल न जाने के पीछे की वजह अतिरिक्त फीस माना गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 80 से 90 मिलियन बच्चे अपनी फीस का भुगतान करने के लिए बाहरी वित्तीय सहायता जैसे लोन और स्कॉलरशिप पर निर्भर हैं।

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