विश्व ओजोन दिवस : पृथ्वी का सुरक्षा कवच है ओजोन परत, इसके बिना संकट में पड़ जाएगा सभी का जीवन

world ozone day

चैतन्य भारत न्यूज

हर साल 16 सितंबर को पूरी दुनिया में ‘विश्व ओजोन दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक अल्ट्रा वाइलट किरणों से बचाना और साथ ही हमारे जीवन को संरक्षित रखनेवाली ओजोन परत के विषय में जागरूक करना है। बता पृथ्वी की सतह से करीब 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओजोन गैस की एक पतली परत पाई जाती है। यह परत सूर्य से आने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन को पृथ्वी पर आने से पहले ही सोख लेती है। यदि यह रेडिएशन पृथ्वी पर बिना किसी परत से सीधे पहुंच जाए तो सभी मनुष्य, पेड़-पौधे और जानवरों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।



पृथ्वी पर जीवन यापन करने के लिए ओजोन परत होना बहुत जरूरी है। सूर्य से सीधी आने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के प्रभाव से कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियां भी हो सकती है। इन्हीं रेडिएशन से ओजोन परत हमें बचाती है। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि, हमारे जीवन की रक्षा करने वाली ओजोन परत अब खुद खतरे में है। जी हां… बहुत पहले ही ओजोन परत पर छेद हो गए हैं, जिन्हें ओजोन होल्स कहा जाता है। पहली बार इन होल्स का साल 1985 में पता चला था। पृथ्वी पर इस्तेमाल हो रहे कई तरह के केमिकल ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे ओजोन परत का और ज्यादा पतली होकर फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।

फैक्ट्री में इस्तेमाल किए जाने वाले खतरनाक केमिकल हवा को प्रदूषित करते हैं। इससे ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचता है। दुनिया में कई ऐसे देश भी हैं जिन्होंने ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल पर पाबंदी लगा दी है। बता दें ओजोन परत के बिगड़ने से जलवायु परिवर्तन को भी बढ़ावा मिलने लगता है। इसके कारण धरती का तापमान भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी गंभीर संकट को देखते हुए ही हर साल 16 सितंबर को दुनियाभर में ओजोन परत के संरक्षण को लेकर जागरुकता अभियान चलाया जाता है।

ये भी पढ़े…

आज दुनियाभर में मनाया जा रहा विश्व पर्यावरण दिवस, जानिए क्या है इस साल की थीम

केले से बनाया सेनेटरी पैड, 122 बार धोकर दो साल तक कर सकते हैं इस्तेमाल

पेड़ों को कटते देख रो पड़ी 9 साल की बच्ची, मुख्यमंत्री ने बनाया ग्रीन मणिपुर मिशन का ब्रांड एंबेसडर

Related posts