कठपुतली दिवस : भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय है कठपुतली का खेल, मनोरंजन के साथ देती है संदेश

world puppet day, world puppet day 2020

चैतन्य भारत न्यूज

भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब लोक कलाओं में झलकता है। इन्हीं लोककलाओं में कठपुतली कला भी शामिल है। यह देश की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम भी है। प्राचीन समय में कठपुतली के माध्यम से जनता तक कोई भी जानकारी, संदेश पहुंचाने का कार्य किया जाता था। लेकिन आधुनिक सभ्यता के चलते मनोरंजन के नित नए साधन आने से सदियों पुरानी यह कला अब लुप्त होने की कगार पर है। इसलिए लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल विश्व कठपुतली दिवस 21 मार्च को मनाया जाता है। आइए जानते हैं कठपुतली का इतिहास और कैसे हुई इसकी शुरुआत।



world puppet day, world puppet day 2020

कठपुतली का इतिहास

कठपुतली का इतिहास बहुत ही पुराना है, यह रंगमंच पर खेले जाने वाले प्राचीनतम खेलों में से एक है। यह भारत के राजस्थान प्रदेश की बहुत ही पुरानी व समर्द्ध कला है। कठपुतली राजस्थानी भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। कठ + पुतली, कठ का अर्थ होता है लकड़ी तथा पुतली का अर्थ होता है गुड़िया। कठपुतली मतलब पूरी तरह लकड़ी से बनी हुई गुड़िया, जिसमें सूती कपड़ा और धातु के तार भी काम में आते हैं। यह माना जाता है कि कठपुतली लोक कला का इतिहास लगभग 1500 साल पुराना है।

world puppet day, world puppet day 2020

यह लोक कला राजस्थान के नागौर तथा मारवाड़ जिले के भट आदिवासी जाति के लोगों का पारंपरिक व्यवसाय भी है। कठपुतलियों को तार के माध्यम से उंगलियों पर नचाया जाता है। राजस्थान में कठपुतली नाच न केवल मनोरंजन का स्रोत है, बल्कि इस लोक कला के जरिए नैतिक और सामाजिक शिक्षा का प्रचार-प्रसार भी होता है तथा सामाजिक मुद्ददों और कुरीतियों को उजागर किया जाता है।

world puppet day, world puppet day 2020

कैसे हुई इसकी शुरुआत?

इस दिवस को मनाने का विचार ईरान के कठपुतली प्रस्तुता जावेद जोलपाघरी के मन में आया था। साल 2000 में माग्डेबुर्ग में 18वीं Union Internationale de la Marionnette, (UNIMA) सम्मेलन के दौरान यह प्रस्ताव विचार के हेतु रखा गया। इसके बाद साल 2002 के जून माह में अटलांटा में काउंसिल द्वारा इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया और पहली बार इसे साल 2003 में मनाया गया।

world puppet day, world puppet day 2020

पहले कठपुतली कलाकार अपने ग्रुप के साथ गांव-गांव घूमते थे और तरह-तरह की कहानियों के नाटक दिखाकर अपना गुजारा करते थे। इससे कठपुतली कला का विस्तार पूरे देश में हो गया और यह अलग-अलग राज्यों की भाषा, पहनावे और लोक-संस्कृति के रंग में रंगने लगी। अंग्रेजी शासनकाल में यह कला विदेशों में भी पहुंच गई। आज यह कला इंडोनेशिया, थाईलैंड, जावा, श्रीलंका, चीन, रूस, रूमानिया, इंग्लैंड, अमरीका, जापान में पहुंच चुकी है।

Related posts