विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस: बुजुर्ग बोझ नहीं हैं, उन्हें हंसने-मुस्कुराने दीजिए

चैतन्य भारत न्यूज

हर वर्ष 21 अगस्त को ‘विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन बुजुर्गों को सम्मान देने का होता है। वैसे तो साल के सभी दिन बुजुर्गों का सम्मान करना हमारा धर्म है लेकिन इस दिन नई पीढ़ी को यह बताया जाता है कि बुजुर्ग बोझ नहीं हैं। उन्हें बताया जाता है कि जिस सुंदर-सी बगिया में आप खिलखिला रहे हो, उसको इन्हीं लोगों ने सींचकर इतना खूबसूरत बनाया है।

विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस का इतिहास 1988 के समय से है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने इस दिन की शुरुआत की थी। रोनाल्ड रीगन वरिष्ठ नागरिक दिवस का प्रचार करने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने 19 अगस्त, 1988 को इस पर हस्ताक्षर किए थे और तब से ही 21 अगस्त का दिन ‘वरिष्ठ नागरिक दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा।

बढ़ती उम्र के साथ-साथ बुजुर्गों की सेहत में गिरावट आ जाती है और साथ ही उनकी मानसिक एवं शारीरिक क्षमताओं में कमी आ जाती है। इन दिनों बुजुर्गों के साथ अमानवीय अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं, जिनको रोका ही जाना चाहिए। इस दिन को मनाने का उद्देश्य बुजुर्ग लोगों की स्थिति के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। इस दिन बुर्जुगों की क्षमता और ज्ञान से सीख लेकर भी उनकी उपलब्धियों और योग्यता की सराहना की जा सकती है। साथ ही यह भी बताया जाता है कि जिन भी बुजुर्गों ने मेहनत कर अपने बच्चों को उच्चस्तरीय शिक्षा दिलाकर कामयाब बनाया है वहीं बच्चे उनको धन्यवाद दें और उनका सम्मान करें।

बता दें सरकार द्वारा बुजुर्गों को कई सुविधाएं दी गई हैं। 60 साल से ऊपर के प्रत्येक नागरिक इन सभी सुविधाओं के हकदार हैं। वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे के किराए में 40 प्रतिशत छूट दी जाती है। इसके अलावा उनके लिए सरकारी बसों में कुछ सीटें भी आरक्षित रखी जाती हैं। एयर लाइन्स में भी उन्हें 50 प्रतिशत तक की छूट देने की व्यवस्था रखी गई है। बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों को कई तरह की सुविधाएं प्राप्त हैं।

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