World TB Day: धीरे-धीरे मौत के मुंह में ले जाती है यह बीमारी, ये लक्षण दिखाई देते ही तुरंत कराएं जांच

चैतन्य भारत न्यूज

टीबी एक जानलेवा बीमारी है जो भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में तेजी से फैली हुई है। लोगों के बीच इस बीमारी के विषय में जागरूकता फैलाने के लिए 24 मार्च को ‘विश्व टीबी दिवस’ (World Tuberculosis Day 2021) के रूप में मनाया जाता है। ट्यूबरकुल बेसिलाइ (टीबी) गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। दुनियाभर में होने वाली मौतों के 10 प्रमुख कारणों में टीबी एक बड़ा कारण है। समय रहते अगर इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो यह घातक बीमारी व्यक्ति को धीरे-धीरे मौत के मुंह में ले जाती है। ऐसे में टीबी से बचने के लिए लोगों को सावधानी की जरूरत है।

टीबी यानी ट्यूबरक्युभलोसिस बैक्टीरिया से होनेवाली बीमारी है। सबसे कॉमन फेफड़ों का टीबी है और यह हवा के जरिए एक से दूसरे इंसान में फैलती है। मरीज के खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वालीं बारीक बूंदें इन्हें फैलाती हैं। ऐसे में मरीज के बहुत पास बैठकर बात की जाए तो भी इन्फेक्शन हो सकता है। फेफड़ों के अलावा ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गले आदि में भी टीबी हो सकती है। फेफड़ों के अलावा दूसरी कोई टीबी एक से दूसरे में नहीं फैलती। टीबी खतरनाक इसलिए है क्योंकि यह शरीर के जिस हिस्से में होती है, सही इलाज न हो तो उसे बेकार कर देती है। फेफड़ों की टीबी फेफड़ों को धीरे-धीरे बेकार कर देती है तो यूटरस की टीबी बांझपन की वजह बनती है, ब्रेन की टीबी में मरीज को दौरे पड़ते हैं तो हड्डी की टीबी हड्डी को गला सकती है।

टीबी के प्रकार

टीबी कई प्रकार की होती है। ये दिमाग, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। लेकिन लोगों में सबसे ज्यादा खतरा फेफड़ों की टीबी का होता है।

टीबी के लक्षण

  • 3 हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी हो
  • खांसी के साथ बलगम आता हो
  • बलगम में कभी-कभार खून आ रहा हो
  • भूख कम लगती हो
  • वजन कम हो रहा हो
  • शाम या रात के वक्त बुखार आ रहा हो और सांस उखड़ती हो
  • सांस लेते हुए सीने में दर्द हो

मरीज क्या करे

  • तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
  • दवा का पूरा कोर्स लें, वह भी नियमित तौर पर।
  • डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करे।
  • आमतौर पर बीमारी खत्म होने के लक्षण दिखने पर मरीज को लगता है कि वह ठीक हो गया है और इलाज रोक देता है। ऐसा बिलकुल न करें। इससे दवा के प्रति रेजिस्टेंट पैदा हो सकता है और बीमारी तो बढ़ ही सकती है, दूसरों में भी टीबी फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मास्क पहनकर रखें। मास्क नहीं है तो हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर कर लें। इस नैपकिन को ढक्कनवाले डस्टबिन में डालें। बाद में इन नैपकिन को आग लगा दें।
  • यहां-वहां थूकें नहीं। मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूके और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। प्लास्टिक में आग लगाने से बचें।

टीबी का इलाज

पहले के समय में टीबी का इलाज नहीं था जिसके कारण कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। लेकिन अब टीबी का इलाज अब पूरी तरह संभव है। टीबी की पहचान के बाद अपने डॉक्टर की सलाह से एंटी टीबी दवाइयों से तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए। टीबी के इलाज के लिए एंटीबॉयोटिक्स का 6 से 8 महीनों का कोर्स होता है।

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