12 पक्षदार, 14 अपील… यहां जानें अयोध्या विवाद से जुड़ी अहम जानकारी

ayodhya case

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के फैसले पर इस समय पूरे भारत की निगाहें टिकी हुईं हैं। इस एक फैसले से कई सालों से चलते आ रहे मामले का अंत हो जाएगा। फैसला आने से पहले जानते हैं कि राममंदिर मामले में हिंदू-मुस्लिम पक्षकार आखिर कौन हैं? साथ ही इस मुकदमे में कितनी अपीलें दायर की गईं हैं।



जानकारी के मुताबिक, अयोध्या मामले में करीब 14 अपील दायर की गईं हैं। इनमें से 8 अपील मुस्लिम पक्षकारों द्वारा और 6 हिंदू पक्षकारों की तरफ से दायर की गईं हैं। इन दोनों ही समुदायों की ओर से 6-6 पक्षकार हैं। मुस्लिम पक्षदारों द्वारा दायर की गईं अपील सभी हिंदू पक्षकारों के खिलाफ है और हिंदू पक्षकारों की अपील ज्यादातर हिंदू पक्षकारों के खिलाफ हैं।

कौन हैं मुख्य पक्षकार

पहला पक्ष – मस्जिद के अंदर विराजित प्रभु श्री राम, जिनके पैरोकार विश्व हिंदू परिषद है। इस मामले में परिषद ने मस्जिद के अंदर भगवान राम के विग्रह होने की बात कहकर अपना पक्ष रखा था।
दूसरा पक्ष – विवाद में दूसरा पक्ष सनातन हिंदुओं की संस्था निर्मोही अखाड़ा है। बता दें निर्मोही अखाड़ा पिछले करीब सवा सौ साल से इस स्थान पर राम मंदिर बनाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
तीसरा पक्ष – विवाद का तीसरा पक्ष उत्तरप्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड है, जिसमें कुछ स्थानीय मुस्लिम है।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में अब तक सुब्रमण्यम स्वामी और वसीम रिजवी की याचिका समेत कुल 32 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। बता दें अयोध्या राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामला अब अंतिम चरण में है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस पर आखिरी बहस हो रही है। दोनों पक्षों द्वारा अंतिम दलीले रखी जाएंगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने यह साफ कह दिया है कि, इस मामले की सुनवाई बुधवार शाम पांच बजे खत्म हो जाएगी।

क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला?

बता दें 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि, 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर बांट दिया जाए। हालांकि, कोर्ट के इस फैसले को किसी भी पक्ष ने नहीं माना और फिर सभी ने इस फैसले की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जिसके बाद 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी थी।

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