योगिनी एकादशी : इस व्रत को करने से एक बार में मिलता है 28 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य

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चैतन्य भारत न्यूज

योगिनी एकादशी का हिन्‍दू धर्म में बड़ा महत्‍व है। इस दिन सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु की पूजा की जाती है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी को ही योगिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि, इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु का ध्यान किया जाए तो मनुष्य को उसके हर पाप से मुक्ति मिल जाती है। इस बार योगिनी एकादशी 17 जून यानी बुधवार को है।

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पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार कहा गया है कि, योगिनी एकादशी का व्रत करने से 28 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य प्राप्त होता है। योगिनी एकादशी को शयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी की पूजा विधि और महत्व…

योगिनी एकादशी की पूजा विधि 

  • एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले पवित्र जल से स्नान करें।
  • इसके बाद पूजा घर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर की अक्षत्, चंदन, पुष्प, धूप आदि से पूजा करें।
  • भगवान को स्नान कराने के बाद ‘विष्णुसहस्त्रनाम’ का पाठ करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय महामंत्र’ का जाप करें।
  • एकादशी की रात को प्रभु की भक्ति में जागरण करें और उनके भजन गाएं। साथ ही भगवान विष्णु की कथाओं का भी पाठ करें।
  • द्वादशी के दिन उपयुक्त समय पर कथा सुनने के बाद व्रत खोलें।

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योगिनी एकादशी पर दान का महत्व

इस दिन दान करने का अधिक महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन जल और अन्न का दान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिन भर अन्न नहीं खाना चाहिए, वह फलाहार ले सकते हैं। आप चाहे तो निर्जला व्रत भी रख सकते हैं। इस दिन पीपल का पौधा लगाएं और निर्धनों को वस्त्र या धन का दान करें।

 

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