जयंती विशेष: जोहरा सहगल इकलौती ऐसी अभिनेत्री जिन्होंने 4 पीढ़ी के अभिनेताओं संग किया है काम, बचपन में चली गई थी आंखों को रोशनी

zohra sehgal

चैतन्य भारत न्यूज

बॉलीवुड की सबसे जिंदादिल अभिनेत्रियों में शुमार जोहरा सहगल की आज जन्मतिथि है। जोहरा का जन्म 27 अप्रैल 1912 को उत्तर प्रदेश में रामर के रोहिल्ला पठान परिवार में हुआ। उनका मूल नाम ‘साहिबजादी जोहरा बेगम मुमताजुल्ला खान’ है। बचपन में जोहरा सहगल को एक बीमारी ग्लूकोमा की वजह से उनकी आंखों को रोशनी लगभग चली गई थी। हालांकि उनका इलाज हुआ और वह ठीक हो गईं। आइए जानते हैं जोहरा से जुड़ी कुछ खास बातें-

पारंपरिक सुन्नी मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ी जोहरा बचपन से ही विद्रोही स्वभाव की थीं। उन्हें खेलना-कूदना और धूम मचाना बेहद पसंद था। बचपन में ही अपने चाचा के साथ भारत एशिया और यूरोप की सैर कार से की। वहां से लौटने पर उन्हें लाहौर के क्वीन मैरी कॉलेज में दाखिल करा दिया गया। जोहरा की मां चाहती थी कि वे कॉलेज में पढ़ें और इसीलिए उन्होंने अपनी मां की ख्वाहिश को पूरा करने का फैसला किया था। क्वीन मैरी से ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद जोहरा ने एक ब्रिटिश एक्टर से यूरोप में एक्टिंग की ट्रेनिंग ली थी।

जोहरा ने ऐसे समय में अभिनेत्री बनने का फैसला किया था जब महिलाएं फिल्मों में आने से कतराती थीं। जोहरा मुबंई में 14 सालों तक पृथ्वी थियेटर से जुड़ी रही थी। कई सालों की मेहनत के बाद जोहरा को के अब्बास की फिल्म ‘धरती के लाल’ में पहला फिल्मी रोल मिला था। फिर उन्होंने ‘नीचा नगर’ फिल्म में काम किया। इस फिल्म के जरिए जोहरा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई थी और उन्होंने 1946 में कान फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड भी जीता था। फिल्मों ले साथ ही जोहरा ने गुरु दत्त की ‘बाजी’ (1951) राज कपूर की आवारा समेत कुछ हिन्दी फिल्मों के लिए नृत्य भी किया।

जोहरा सहगल ने ‘चीनी कम’, ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘दिल से’, ‘वीर जारा’ जैसी हिंदी फिल्मों में ‘चुलबुली और ज़िंदादिल दादी’ बनकर दर्शकों के दिलों में जगह बनाई थी। वहीं जोहरा की आखिरी हिंदी फिल्म 2007 में संजय लीला भंसाली की सांवरिया थी। कम फिल्मों में नजर आने के बाद भी जोहरा ने दर्शकों के दिलों में एक अलग ही छाप छोड़ी है। जोहरा इकलौती ऐसी अभिनेत्री रहीं हैं जिन्होंने चार पीढ़ी के कलाकारों संग काम किया है। पृथ्वीराज कपूर से लेकर रणबीर कपूर सहित सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ जोहरा काम कर चुकीं हैं।

जोहरा सहगल को 1998 में पद्मश्री, 2002 में पद्मभूषण और 2010 में पद्म विभूषण से नवाजा जा चुका है। जोहरा के पास खुद पर हंसने का भी हुनर था। जोहरा हमेशा कहती थीं कि- ‘तुम क्या अब मुझे इस तरह देखते हो जब में बूढ़ी और बदसूरत हो गई हूं, तब देखते जब मैं जवान और बदसूरत थी।’ 10 जुलाई 2014 को उन्होंने 102 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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